Friday, October 25, 2019

धनतेरस / तमन्ना मतलाणी

🙏 *जय झूलेलाल* 🙏
🔥  *सिंधियत जी जोति*                  
  🌹 *धनतेरस* 🌹 
              
                   जीअं त असां सभिनी खे जा॒ण आहे त अजु॒ धनतेरस जो डि॒णु आहे. हर साल वांगु॒र असां सभेई *हिन्दू रीति-रिवाज* जे मूजिब इन डि॒ण खे मल्हाइण लाइ बाजार वञी करे कुझु *नईं शयुनि जी खरीद* कंदासीं.
                  इन डीं॒हं ते *सोनु , चांदी , स्टील* या कहिं *बि॒ए प्रकार जी धातूअ जी खरीदी खे शुभ मञियो* वेंदो आहे.  असां *सिंधी परिवार* पहिंजी हैसियत ऐं जरूरत जे आधार ते इन्हनि धातुनि जी खरीद कंदा आहियूं.
                  असां सिंधी वापारी कौम जा आहियूं इन करे असां सभिनि खे जा॒ण आहे त वापार सां केतरनि ई माण्हुनि खे रोजगार मिलंदो आहे. रुगो वापारीअ जो ई न बल्कि घणेई बिए परिवारनि जो अस्त्तित्व बि बाजार जी रौनक ते आश्रित आहे.  इन करे असां सभेई अजु॒ हिकु निर्णय कयूं त असां को बि सामान  online मार्केट मां न घुराए करे सिधो बाजार मां खरीद कंदासीं . इन जो सिधो फाइदो असांजी वापारी कौम खे मिलंदो ऐं असांजे देश जो पैसो विदेशी कंपनियुनि जे माध्यम सां बा॒हिर न वेंदो.
                 धनतेरस जी कथा मूजिब अजु॒ जो डीं॒हुं *देवताउनि जे वैद्य धन्वंतरि* खे समर्पित आहे. कथा में बु॒धायो वयो आहे त....
                 हिकु भेरो *यमराज*, *दूतनि* खां पुछियो त कहिंजा प्राण *खसींदे समय* तव्हांजे मन मे *दया भाउ* न ईंदो आहे छा ? *देव-दूतनि यम जे भव* खां चयो त *"असां त रुगो॒ पहिंजो फर्जु निभाईंदा आहियूं. पर कहिंजी अकाल मृत्यु जो अफसोस असांखे बि थींदो आहे."*
                देवदूतनि बि हिमथ करे यमराज खां हिकु सुवालु कयो, *छा अकाल मृत्यु खे टारण जो को रस्तो आहे?* यमराज वडे॒ मनोयोग सां जवाबु डि॒नो त, *जेको माण्हू धनतेरस जे डीं॒हुं ड॒खिण दिशा में डी॒यो बा॒रींदो उन जी अकाल मृत्यु कड॒हिं बि कोन थींदी.*
              त अचो साथियो असां सभेई  पूरे *शरदा-भाव* सां धनतेरस जो डि॒णु मल्हाए करे यमराज खां *वडी॒ आवरजा* जो वरदान घुरी करे पहिंजनि जी खुशहालीअ जो मार्गु सवलो कयूं......     
             
              *सभिनी खे धनतेरस जूं शुभकामनाऊं , लक्ष्मी माता सभिनी जी झोली धनधान्य सां भरिपूरु करे.....* 
              
              ✍🏻 *तमन्ना मतलाणी*
                            *गोंदिया* 
                        *२५/१०/२०१९*

Sunday, September 29, 2019

अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं

*अजमेर के पत्रकारों-साहित्यकारों की लेखन विधाएं*

*भाग बारह*
*डॉ. लाल थदानी*
पेशे से डॉक्टर ,(एम.डी,पीएसएम) और पब्लिक हेल्थ मैनेजर हैं । वे 7 जुलाई 2000 से 31 दिसंबर 2003 तक राजस्थान सिंधी अकादमी के अध्यक्ष रहे हैं । डॉ. लाल थदानी अजमेर  एक अरसे से सामाजिक , सांस्कृतिक, और स्वास्थ्य क्षेत्रों में प्रशासनिक गतिविधियों में सर्वाधिक सक्रिय लोगों में शुमार किए जाते हैं। वे भूतपूर्व राजस्व मंत्री स्वर्गीय श्री किशन मोटवानी के बेहद करीबी रहे और प्रमुख समाजसेवी होने के नाते अजमेर पश्चिम फिर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से और जयपुर सांगानेर  विधानसभा क्षेत्र से 
कांग्रेस टिकट के प्रबल दावेदारों में भी शामिल रहे हैं । डॉ लाल थदानी
समाजसेवा के क्षेत्र में वे अनेक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं, मगर सिंधु सत्कार समिति एवं संदेश संस्था के संस्थापक अध्यक्ष रहते हुए अनेकानेक समाजोपयोगी  उत्प्रेरक गतिविधियां संचालित की हैं। 
चिकित्सा और समाज सेवा क्षेत्र में
वे सन् 1998 में राष्ट्रीय स्तर पर विजयश्री अवार्ड और सन् 2001 में रेड एंड व्हाइट बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं। सन् 1998 में बेस्ट सिटीजन ऑफ इंडिया, मदर टेरेसा अवार्ड , सन् 1999 में राज्यपाल के हाथों सिंधी अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं। 
उन्हें लेखन में भी रुचि है। उनकी एक पुस्तक काश मैं कुछ कर पाता और एक गजल संग्रह अल्फ़ाज़_ दिल से
का प्रकाशन हो चुका है। 
इसके अतिरिक्त पाक्षिक समाचार पत्र हेमू कालानी के कार्यकारी संपादक हैं। उनके द्वारा लिखित, निर्देशित दहेज आधारित नाटक टूटती रेखाएं और राजनीतिक व्यंग्य मूंगफली का छिलका को अखिल भारतीय स्तर पर युवा महोत्सव  मौलाना आजाद और आल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट दिल्ली में प्रथम पुरस्कार मिल चुका है। डॉ लाल थदानी ने नशा मुक्ति , अंगदान , डेंगू , मलेरिया , टीकाकरण, प्लास्टिक दुरुपयोग , ओज़ोन का बचाव , एड्स, कुष्ठ रोग, दिव्यांग , हुक्का बार, कैंसर , वृक्षारोपण , रक्तदान, मानसिक अवसाद और डिप्रेशन , आत्महत्या , एसिड अटैक ,
महिला सशक्तिकरण आदि विषयों पर अनेक ब्लॉग्स लिखे हैं और अनेक लेख अख़बारों में प्रकाशित हुए है ।
वे उम्दा वक्ता और गायक भी हैं । डॉ लाल थदानी हिन्दी , सिन्धी और अंग्रेजी में जबरदस्त पकड़ और दखल रखते हैं ।

*श्री हरीश वर्यानी*
सिंधी भाषा के दैनिक समाचार पत्र हिंदू के अजमेर संस्करण के सम्पादक श्री हरीश वर्यानी अजमेर के पत्रकार जगत व देश के सिंधी साहित्य जगत में जाना पहचाना नाम है। सिंधी भाषा पर उनकी अच्छी पकड़ है। एक ओर जहां अरबी लिपि के जानकारों की संख्या लगातार कम होती जा रही है, उन्होंने सिंधी भाषा का दैनिक गत तकरीबन 37 साल से प्रकाशित-संपादित कर सिंधी भाषा व साहित्य के संरक्षण के लिए अविस्मरणीय काम किया है। इस योगदान के लिए वे साधुवाद के पात्र हैं। वे तीन बार राजस्थान सिंधी अकादमी के सदस्य रह चुके हैं। आकाशवाणी, जयपुर पर उनकी अनेक वार्ताएं प्रसारित हो चुकी हैं।

*जनाब नवाब हिदायत उल्ला*
जनाब नवाब हिदायत उल्ला का नाम यूं तो नई पीढ़ी के उभरते हुए पत्रकारों में शुमार है, मगर रिपोर्टिंग में सक्रियता के चलते जल्द ही स्थापित पत्रकारों में गिने जाने लगे हैं। वर्तमान में अजयमेरू प्रेस क्लब के महासचिव हैं। उन्होंने बी.ए. की डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता में कदम रखा और जयपुर की एक समाचार व फीचर एजेंसी से जुड़ गए। इसके अतिरिक्त दैनिक हुक्मनामा को भी अपनी सेवाएं दी। वर्तमान में स्वयं का पाक्षिक समाचार पत्र सलाम अजमेर प्रकाशित करते हैं। साथ ही पंजाब केसरी में भी संवाददाता के रूप में काम कर रहे हैं। विशेष रूप से दरगाह इलाके की रिपोर्टिंग में महारत हासिल की है।









*-तेजवानी गिरधर*
*7742067000*

https://ajmernama.com/nazariya/326079/

Wednesday, September 25, 2019

जस्टिस विजया कमलेश ताहिलरमानी / मुख्य न्यायाधीश के पद से इस्तीफा दिया

 जस्टिस विजया कमलेश ताहिलरमानी / मुख्य न्यायाधीश के पद से इस्तीफा दिया

यह है माननीया न्यायाधीश उच्च न्यायालय जस्टिस विजया कमलेश ताहिलरमानी ।

जिन्होंने बहुचर्चित गुजरात दंगो में   बिल्किस बानो रेप - मर्डर केस में ट्रायल कोर्ट के द्वारा सुनाई गई सजा को मुंबई उच्च न्यायालय में बहाल रखा था ।। 

लगभग 20 दिन पहले तक यह मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश थी और इनके बेहतरीन कामों को के मद्देनजर  इनकी वरिष्ठता क्रम को दरकिनार करते हुए हिंदुस्तान की सबसे छोटी हाईकोर्ट मेघालय हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद पर ट्रांसफर किया गया ।

 जिसके विरोध स्वरूप इन्होंने न्यायाधीश के पद से इस्तीफा दे दिया।
 
इनके इस्तीफे के विरोध में मद्रास हाई कोर्ट में वकीलों ने बड़ा प्रदर्शन भी किया था। लेकिन 1 दिन पहले इनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।
 बाकी आप सभी प्रबुद्ध जन स्वयं समझ सकते हैं।

सत्य के पथ पर चलने की जो कीमत इन्होंने चुकाई है,, इनके इस जज्बे को सलाम !!

साभार

डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष राजस्थान
सिन्धी अकादमी, जयपुर ।
drlal2010@gmail.com

Monday, September 16, 2019

सिन्धी ॿोली ऐं लिपी (सूरतख़ती)

सिन्धी ॿोली ऐं लिपी (सूरतख़ती)

ॿोली माना ॻाल्हायल ॿोलनि (लफ़्ज़नि) जो भन्डारु .

लिपी माना ॻाल्हायल ॿोलनि (लफ़्ज़नि) जे सुरनि - उचारनि (आवाज़नि) जा लिखियल रूप (सूरतूं) जिनि खे पढ़ी सघिबो आहे .

ॿोली आत्मा आहे त उन्हं जी पंहिंजी लिपी, रूपु माना अवतारु हूंदी आहे . छो त ॿोलीअ जी पंहिंजी लिपीअ में ई सुर ऐं उचार - आवाज़नि जे लिखियल रूपनि खे सही - सही पढ़ी सघिजे थो .  

सिन्धीअ में ॿारहां (१२) सुर (Vowels) ऐं चालीह (४०) उचार (Consonants) मिलाए कुलु ॿावन्झा (५२) अखर आहिनि . सिन्धीअ जी मूलु - असुली लिपी देवनागिरीअ में ॿारहनि सुरनि जा रूप आहिनि ऐं ॿारहनि मां यारहनि (११) जूं लाकिनाऊं (ऐराब) -- ज़ेरि, ज़बर ऐं पेशु वगेरह) बि अलॻि आहिनि . 

सिन्धी देवनागिरी लिपीअ जा अखिरी रूप - सूरतूं ॻाल्हायल अखरनि जे आधार ते ठहियल आहिनि . इन्हं अखर-माल्हा (अल्फा बेट) जे अखरनि जो सिलसिलो मूंहं जे लिङनि सां उचारिण वारे रिथाइते सिलसिले सारूं (मूजिब) आहे . 

इन्हं करे सिलसिले में पहिरियों छाती मां निकितल ॾह सुर 'अ', 'आ' खां 'ओ', 'औ', यारहों नक मां टुॿिके वारो 'अं' = 'ं'  ऐं दुन वटां सघारो सुरु 'ह' ताईं वारा ॿारहां सुर रखिया वया आहिनि .

पो ॼिभ ऐं काकिड़े सां उचारियल 
उचार -- क, ख, ग, ॻ, घ, ङ . 

पो ॿिन्हीं तारुनि जे विच मां उचारियल चीभाटिणा उचार -- 
च, छ, ज, ॼ, झ, ञ . 

पो ॼिभ उबिती करे मथें तारूंअं सां उचारियल तारुवां उचार --
र, ल, ट, ठ, ड, ॾ, ढ, ड़, ढ़, ण
ट्र, ड्र ऐं ढ्र .

पो ॾन्दनि सां ॼिभ टकिराए उचारियल उचार -- 
त, थ, द, ध ऐं न .

पो चपनि सां उचारियल उचार -- 
प, फ, ब, ॿ, भ ऐं म .

पो गसिणा उचार -- स, श ऐं 
अधु सुर -- व ऐं य .

जॾहिं त अरबी ऐं फ़ारसी लिपीअ जे अखरनि जा रूप ॻाल्हायल अखरनि जे आधार ते ठहियल कोन्हंनि ऐं सिलसिलो बि अखिरी रूपनि जी हिक - जेढ़ाईअ वारो बेढंगो आहे . 

अरबी सिन्धी लिपीअ में सुरनि जा अलॻि रूप (सूरतूं) कोन्हंनि, छड़ो लाकिनाऊं (ऐराब) -- ज़ेरि, ज़बर ऐं पेशु वगेरह आहिनि . हीअ सिन्धी न पर पराई अरबी लिपी आहे, इन्हं करे हिन जे अखिरी रूपनि खे सिन्धी उचारनि - आवाज़नि वांगरु सही सही लिखी ऐं पढ़ी बि न सघिबो आहे .

प्रेमु तनवाणी - 9685943880

साभार : डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष राजस्थान
सिंधी अकादमी जयपुर ।



माउ - ॿोलीअ जा वेरी सिन्धी


माउ - ॿोलीअ जा वेरी सिन्धी

असां सिन्धी ! सन्सार खे जीअण जो नीति - रीति (सभ्यता - संस्कृती) सेखारिण वारा "मुअनि जे ॾड़े" जा धणी आहियूं . पर हमलावरनि जी अरबी-फ़ारसी लिपी वरिताए सुञाणप जो आधारु पंहिंजी माउ - ॿोलीअ खे ई खतमु करे रहिया आहियूं . 

ॿोलीअ जा वॾा - वॾा साहित्कार (अदीब), डाक्टर कन्धु मथे करे, चवनि था त असां जी सिन्धी ॿोली घटि में घटि ७ हजारु वरियह पुराणी आहे . पर १३ जुलाइ, १८५३ जे ॾींहुं सिन्धीअ मथां थफियल अरबी लिपीअ खे १६६ वरियहनि खां "सिन्धी लिपी" चवंदा रहनि था . जहिंमें ५२ मां ३७ निजु सिन्धी ऐं १५ माना ३५ टका अरबी, फ़ारसी जा अखिरी रूप आहिनि, जेके छड़ो अरबी, फ़ारसी ऐं उर्दू ॿोल ई लिखण लाइ कमि ईंदा आहिनि . 

अकुल जा अन्धा ऐं अरबी-फ़ारसीअ जा ग़ुलाम ! ईहो नथा सोचिनि त जे सिन्धी ॿोली घटि में घटि ७ हजारु वरियह पुराणी आहे त अरबी सिन्धीअ खां अॻु सिन्धी साहितु ऐं इतिहासु केढ़ी लिपीअ में लिखियो वयो ? 

सिन्धीअ जी मूलु - असुली, सुठी ऐं सही में सही लिपी देवनागिरी हुई ऐं आहे . जहिंमें ढेरि सारो साहितु - इतिहासु लिखियो वयो . ईसवी सन खां ५०० वरियह अॻु "राजाउनि लाइ सिखिया" ग्रन्थु लिखियो वयो . जिनिखे पाकिस्तानु ठहंदे ई साड़े रख कयो वयो . १५ - १६ सदीअ में "क़ाज़ी कादन जो कलामु" ऐं पो स्वामी प्राणनाथ जी "सिन्धी वाणी" बि देवनागिरी सिन्धीअ में लिखी वई . १८४७ में कैप्टेन जार्ज स्टेक ऐं १८७२ में अर्नेस्ट ट्रम्प सिन्धी अंग्रेजी डिकस्नरी ऐं ग्रामर लिखियो . ईहे किताब अॼु बि आहिनि .

नाले निहालु ॿोलीअ जा सो काल्ड डाक्टर अरबी - फ़ारसी जा ३० - ३५ टका ॿोल (लफ़्ज़) वरिताइण खां सिवा ॼाण नाहे त केढ़े चन्ड्रे - निभाॻे जे चकर में फासी, सुरनि (हर्फ़ इलति) जूं लाकिनाऊं (निशानियूं) हूंदे बि बिना लाकिनाउनि (ज़ेरि, जबर, पेशु) जे लिखी पंहिंजी ई माउ - ॿोलीअ खे खारे खतमु कन्दा रहनि था . 

सिन्धी सभिनी ॿोलिनि खां सुरनि (Vowels) जो निरालो वरिताउ कन्दी आहे . छो त कहिं बि ॿोलीअ जे ॿोलनि खे सम्झण जो आधारु सुर ई हूंदा आहिनि . पर असांजा गुरू (उस्ताद) अरबी-सिन्धी लिपीअ में सुरनि में सन्धो करे नथा लिखनि . जीअं त --

१. अ, इ, उ -- अमरु - उमरु - इमरु, इहो - उहो, हिते - हुते खे सन्धे - भेद सां नथा लिखनि .
२. आई -- आए, वई -- वए खे सन्धे सां नथो लिखनि .
३. उ खे ओ, ओ खे ऊ -- 'हो'  लिखी 'हू' पढ़नि - पढ़ाइनि था .
४. व खे बि ओ लिखनि था . जीअं त -- आयुव, आयव खे आयो लिखिजे थो .
५. ट्र, ड्र ऐं ढ्र खे बिना 'र' जे ट, ड ऐं ढ जो वरिताउ करे सिन्धी ॿोलनि खे खारे लिखिनि था . जहिंसां सभई ॿोल खरनि था ऐं माना ई मटिजी वञे थी .   प्रेम तनवानी
साभार : डॉ लाल थदानी
  पूर्व अध्यक्ष  राजस्थान
सिंधी अकादमी, जयपुर। 


Monday, September 9, 2019

सुप्रसिद्ध अधिवक्ता राम जेठमलानी को कोटि कोटि प्रणाम

💥  सुप्रसिद्ध अधिवक्ता राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन

सुप्रसिद्ध अधिवक्ता राम जेठमलानी
(सिंधी: رام جيٺملاڻي (जन्म : 14 सितम्बर 1923 - मृत्यु : 8 सितम्बर 2019) एक सुप्रसिद्ध भारतीय वकील और राजनीतिज्ञ , आज हमारे बीच नहीं रहे विश्वास करना मुश्किल है।  हालांकि उन्होनें पूरी उम्र बिंदास गुजारी है । राम जेठमलानी लंबे समय से बीमार थे और 95 साल की उम्र में उनका निधन हो गया . उनका अंतिम संस्कार लोधी रोड श्मशान में किया गया.
6 ठी व 7 वीं लोक सभा में वे भारतीय जनता पार्टी से मुंबई से दो बार चुनाव जीते थे । बाद में अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में केन्द्रीय कानून मन्त्री व शहरी विकास मन्त्री रहे थे। 

मशहूर वकील और पूर्व कानून मंत्री राम जेठमलानी के निधन पर राष्ट्रपति कोविंद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू सहित सत्ता , विपक्ष के प्रमुख नेताओं , देश विदेश की सिन्धी समाज के प्रमुख ओहदेदारों , राष्ट्रीय सिंधी समाज के राष्ट्रीय महासचिव और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रतिनिधि डॉ लाल थदानी ने राम जेठमलानी के निधन पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी है।
   
           #रामजेठमलानी

ने न्यायालय और संसद दोनों में समृद्ध योगदान दिया है. वह मजाकिया, साहसी और कभी भी किसी भी विषय पर साहसपूर्वक बोलने से नहीं कतराते थे. वे असाधारण वकील थे और सिंधी समाज ने विशेष रूप से अपना हमदर्द प्रतिष्ठित सार्वजनिक व्यक्ति को खो दिया है । उन्हें कोटि कोटि प्रणाम और नमन ।

मेरी मुलाकात
सिन्धी काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अधिवेशन में श्री राम जेठमलानी ने सांसद के रूप में देशभर से आए 300 प्रमुख सिन्धी प्रतिनिधियों को अपने बंगले पर रात्रि भोज दिया था तब पहली बार मुझे उन्हें पहली बार देखने और सुनने का सौभाग्य मिला था । दोबारा जब जेठमलानी जी मुख्य अतिथि के रूप में
मेयो कॉलेज अजमेर  वार्षिक कार्यक्रम 22 अक्टूबर 2017 में जब आए तो इंटरनेशनल फेडरेशन के अध्यक्ष श्री राम जाव्हारानी की सूचना पर मिलने गया । वे बोले डॉ तेरे बारे में सुना है । तुमसे आशाएं हैं । खुलकर समाज के लिए आ जाओ । दादा आपको लगता है जो मेहनत आपने, सुरेश केसवानी जी ने कि है समाज को लेकर वो कोई और कर पाएगा । तब उन्होंने खट्टे मीठे अनुभव भी सुनाए ।

Dada #RamJethmalani Former Union Law Minister & Present Rajya Sabha Member has passed away. Indeed a tragic loss to the nation esp. Sindhi Community.
I pay my heartfelt condolences to the departed soul.
His passing away is a great loss to our country because he was like an institution.
He was  a great human being,
an internationally acclaimed Advocate, a very big and true defender of democracy and harbinger of world peace.
May His soul rest in peace ! Om Shanti !

#DrLalThadani
ExChairman
#RajSindhiAcademy
#Jaipur

जीवन यात्रा

*जेब में 1 पैसा डालकर सिन्ध कराची से भारत आए थे राम जेठमलानी
वकालत की दुनिया में कमाया नाम
       वह 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कानून मंत्री रहे. साथ ही उन्‍होंने कई हाई प्रोफाइल केस भी लड़े. वे कराची से जेब में एक पैसा डालकर भारत आए थे, इसके बाद उन्‍होंने यहां बड़े-बड़े केस लड़कर वकालत में नाम कमाया।

1. राम जेठमलानी का जन्‍म 14 सितंबर, 1923 को तत्‍कालीन बॉम्‍बे प्रेसीडेंसी के शिकारपुर (अब पाकिस्‍तान का हिस्‍सा) में हुआ था।

2. राम जेठमलानी ने 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री हासिल की. वह विशेष स्थिति में 18 साल की उम्र में वकील बने थे. जबकि वकील बनने की न्‍यूनतम उम्र 21 थी. उन्‍होंने बाद में बॉम्‍बे यूनिवर्सिटी से वकालत में मास्‍टर की।

3. राम जेठमलानी ने अपनी वकालत और प्रोफेसरी की शुरुआत देश के बंटवारे से पहले सिंध प्रांत में की थी. उन्‍होंने कराची में अपने मित्र एके ब्रोही के साथ मिलकर एक लॉ फर्म शुरू की. फरवरी 1948 में देश के बंटवारे के बाद कराची में दंगे भड़क गए थे. ऐसे में व‍ह ब्रोही की सलाह पर भारत आ गए. उस समय वह जेब में सिर्फ एक पैसा डालकर भारत आए थे. इस पैसे के आधार पर वह कुछ दिनों तक यहां शरणार्थी शिविर में रहे थे।

4. जेठमलानी ने अपना पहला केस 17 साल की उम्र में सिंध की कोर्ट में लड़ा था. उन्‍होंने वकील बनने की न्‍यूनतम उम्र के नियम को चुनौती दी थी. भारत में उन्‍होंने पहला केस बॉम्‍बे रेफ्यूजी एक्‍ट के खिलाफ लड़ा था. उन्‍होंने बॉम्‍बे हाईकोर्ट में य‍ह केस लड़ा था।

5. 1954 में वह मुंबई के सरकारी लॉ कॉलेज में पार्ट टाइम प्रोफेसर बने. वह कुल चार बार बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे ।

6. 1977 और 1980 में आम चुनाव में वह जनता पार्टी और बीजेपी की टिकट पर मुंबई नॉर्थ वेस्‍ट सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे. 1985 में उन्‍हें यहां कांग्रेस के सुनील दत्‍त ने हराया।

7. 1988 में वह राज्‍यसभा सदस्‍य बने. 1996 में वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कानून मंत्री बने. 1999 में वह फिर कानून मंत्री बने. 2004 में उन्‍होंने लखनऊ से अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ निर्दलीय उम्‍मीदवार के तौर पर लोकसभा चुनाव लड़ा. लेकिन उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा था।

8. 7 मई, 2010 को उन्‍हें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का चेयरमैन नियुक्‍त किया गया. राम जेठमलानी सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज्यादा फीस लेने वाले वकील थे।

9. जेठमलानी की ओर से लड़े गए कुछ बड़े केसों में से हवाला कांड में लालकृष्ण आडवाणी का बचाव, जेसिका लाल हत्याकांड में मनु शर्मा का बचाव, इंदिरा गांधी के हत्या के आरोपियों का बचाव, राजीव गांधी की हत्या के आरोपियों का बचाव, सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ मामले में अमित शाह का (गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री का) बचाव, 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में कनिमोझी का बचाव, जग्गी हत्या के मामले में अमित जोगी (अजीत जोगी के बेटे) का बचाव वाले केस शामिल हैं।

10. जेठमलानी ने जोधपुर यौन शोषण मामले में आसाराम बापू के बचाव का केस भी लड़ा. भाकपा विधायक कृष्णा देसाई हत्याकांड में शिवसेना के बचाव का केस और अरुण जेटली द्वारा दायर मानहानि मामले में AAP सुप्रीमो व दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बचाव का केस लड़ा।

डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष
राजस्थान सिंधी अकादमी, जयपुर ।

Saturday, August 24, 2019

23 अगस्त थदड़ी पर्व मनाया



*🚩🙏🏻शीतला माता की जय🙏🏻🚩*
23 अगस्त थदड़ी पर्व मनाया 

सिन्धी संस्कृति के अनुसार
अपने परिवार व संतान  की 
रक्षा व उन्नति के लिए 
एक दिन पहले  छटवीं तिथि में 
भोजन बना कर रखा जाता है
और चूल्हे का पूजन करके दूसरे दिन सप्तमी पर चूल्हा नहीं जलाया जाता एवं शीतला माता का पूजन करके परिवार के लिए मंगल कामना की जाती है और पूरा दिन बासी भोजन खाया जाता है....


मेरा आप सभी से  निवेदन है
इस पर्व को *(सिन्धी संस्कृति)* को जीवित रखते हुए
अपने बच्चों को भी शिक्षित करें


*पहिंजे परिवार सां गड्डजी करे*
*थदो भोजन मिठा लोला खाओ*
जहाँ नित्य प्रति हम गरमागरम और मनपसन्द व्यंजनों का आनंद लेते ही रहते हैं तो..
कृपया 365 दिनों में से यह 1 दिन 
*शीतला माता* के नाम करें
और ठंडा भोजन खाएं


इस वर्ष यह पर्व 23 अगस्त को मनाया गया
अर्थात
*22 अगस्त गुरूवार* को
पकाया गया
और 
*23अगस्त शूक्रवार* को 
खाया गया... 
*जय श्री झूलेलाल*

सिंधी त्योहार थदरी जी 
तव्हां सभिनी खे 
करोड़ करोड़ वाधायु 

डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष
राजस्थान सिंधी अकादमी, 
जयपुर ।



Friday, April 12, 2019

अमर शहीद संत कंवर राम साहिब / डॉ लाल थदानी

अमर शहीद संत कंवर राम साहिब जी की जय / डॉ लाल थदानी

संत कंवरराम साहेब जी का *जन्म 13 अप्रैल 1885* को सिंध प्रांत में *जरवार ग्राम में* हुआ था। उनके पिता का नाम ताराचंद तथा माता का नाम तीर्थबाई था।  संत कंवरराम साहेब जी के गुरु का नाम श्री सतराम दास साहिब जी था। बाल्यावस्था से ही इनकी रुचि भजन कीर्तन,गायन व भक्ति भाव मे थी। रोजगार व उदरपूर्ति हेतु इनकी माता इन्हें प्रतिदिन चने (सिन्धी मे कोंहर बोलते हैं )  उबालकर विक्रय हेतू दिया करती थीं। तब ये नन्हा-सा बालक भक्ति भरे भाव से प्रभु की महिमा का गुणगान करता हुआ चने बेचता था। एक दिन इनकी मधुर ध्वनि सुनकर गुरु सतरामदास ने इन्हें अपने समक्ष बुलाया और भजन सुनाने के लिए कहा।तत्पश्चात् रहिड़की के प्रसिध्द  दरबार मे इन्हें स्वीकार कर लिया गया और महाज्ञानी संगीतज्ञ श्री हासाराम जी से संगीत की शिक्षा ग्रहण की साथ ही अपने गुरु साईं सतरामदास साहेब जी की छत्रछाया में बहुत ज्ञानवान हो गए। गुरु की मृत्यु के पश्चात उनका सारा कार्यभार संत कंवरराम जी के कंधों पर आ पड़ा ।संत कंवरराम साहेब  जी गांव - गांव जाकर भक्ति के माध्यम से ईश्वर वंदना करने लगे ।
            एक बार सिंध के सख्खर जिले में महात्मा गांधी जी पधारे । गांधी जी वहां पहली बार पधारे थे, इसलिए उनका दर्शन करने तथा भाषण सुनने के लिए लाखों लोग एकत्रित हो गए । भीड़ के कारण वहां बहुत शोर हो रहा था ।मंच पर उपस्थित नेताओं के प्रयत्न करने से भी शोर शांत नहीं हुआ। तब मंच पर उपस्थित नेताओं ने सामने पंक्ति में बैठे संत कंवर राम साहिब जी को देखा और गांधी जी से आज्ञा लेकर उन्हें निवेदन किया कि आप इस शोर को शांत कीजिए । जैसे ही लोकप्रिय कंठ के धनी इस महान संत ने माईक पर आकर लोगों से शांत रहने की अपील की तो पल भर में ही सारा शोर शांत हो गया ।तब गांधीजी ने भी इस लाड़ले संत की भूरी-भूरी प्रशंसा की।    
               मानव सेवा ही संत कंवर राम साहिब जी का मुख्य ध्येय था । अपंगो, नेत्रहीनो एवं रोगियों की सेवा अपने हाथों से करके वे स्वयं को धन्य मानते थे ।
               एक बार सत्संग करते समय एक महिला ने अपने मृत नवजात शिशु को संत की झोली में डाल दिया। केवल महिला ही जानती थी कि बच्चा मर चुका है पर जैसे ही संत कंवर राम साहिब जी ने उस बच्चे को गोद में लेकर लोरी गाई तो वह मृत बच्चा जीवित हो गया ।महिला रोते हुए संत के चरणों में गिर पड़ी ।बाद में उस महिला ने वहां उपस्थित सभी लोगों को अपने साथ हुए चमत्कार के बारे में बताया तो सभी लोग अचंभित हो उठे।
               संत कंवर राम जी का सदैव एकता और भाईचारे का प्रचार करते थे । सांप्रदायिक भाईचारे के विरोधी एक पीर ने अपने अनुयायियों को इस संत के खिलाफ भड़काया । एक दिन भजन के पश्चात अपनी भजन-मंडली के साथ एक जब संत कंवरराम जी *रुक रेलवे स्टेशन* पर पहुंचे, तब दो बंदूकधारियों ने उनको आकर प्रणाम किया और कार्य सिद्धि के लिए संत जी से दुआ मांगी । गाड़ी चलते ही उन लोगों ने संत कंवरराम जी को( *1 नवंबर 1939 को* ) के दिन गोली मार दी । सर्वधर्म समभाव का ध्वज फहराने वाले मानवता के इस मसीहा ने प्राण त्याग दिए ।उनके शहीद होने की खबर लगते ही सिंध प्रांत के सभी स्कूल, कॉलेज, ऑफिस और बाजार बंद हो गए। दीपावली के त्यौहार में उस वर्ष पूरे प्रांत में दीपक नहीं जलाए गए ।
              अमर शहीद संत कंवरराम साहेब जी की स्मृति में  *1940* से संपूर्ण देश और विदेश में उनकी जयंती व पुण्यतिथि मनाई जा रही है। उनकी स्मृति में सिंधी समाज द्वारा गठित धर्मशालाएं, गौशालाएं, शिक्षण -संस्थाएं ,अस्पताल, विधवा -आश्रम आज भी सुचारू रूप से चल रहे हैं ।
         *ऐसे महान सत्पुरुष को संपूर्ण राष्ट्र का शत शत नमन*🙏🏻🙏🏻

Sunday, January 13, 2019

मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।

जय झूलेलाल

सभिनीन सुहिणन सिंधयुन खे
साल २०१९ जे पहिंरे डिण
लाल लोई ऐं तिरमुरी जूं बेशुमार वाधायूं । सिंधीयत कायम रखो
शल मिठा थियो मिठा रहो ।
सभई सदाई खुश हुजो ।

मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।

💐🇮🇳 उत्तरायण का सूर्य आपके स्वपनों को नई ऊष्मा प्रदान करे, आपके यश एवं कीर्ति में उत्तरोत्तर व्रद्धि हो, उमंग एवं शुभ कार्य  पुनः प्रारम्भ हो  ।
मैं कामना करता हूँ कि यह त्योहार आपके जीवन में हर्षोल्लास एवं ढेर सारी खुशियाँ लेकर आए ||

www.drlalthadani.in
Please Download n Share My App
Live Healthy (Dr.Lal)
8005529714