Monday, August 31, 2020

गांधीधाम जनक भाऊ प्रताप दयाल जी नमन

*अजु_ अज़ीम सिन्धी शख्सियत स्वर्गीय श्री *भाई प्रताप डि_अलदास* जी पुण्य तिथि आहे। दिवंगत जी आत्मा खे शत शत नमनु ऐं वंदनु।*



  !   *Bhai Pratap Dialdas* !

*Bhai Pratap Dialdas* (ڀائي پرتاب ڏيئل داس‎) was born on  14th April 1908. He  was an Indian businessman, philanthropist and freedom fighter, best remembered as the *founder of the towns of Adipur and  Gandhidham*  to resettle displaced sindhi hindus  from Sindh after the partition .

Bhai  Pratap Moolchand Nanwani , Nukh : Karia (He was known and called as *Bhai Pratap Dialdas* ),  was born in Hyderabad, Sindh into an affluent family. Bhai Pratap was widely travelled and had established his businesses in India and abroad. His ethnic as well as international taste is reflected amply in *"Pratab Mahal",* which also had a huge library with books from and  around the world. After the partition of Bristish India, he left along with his family for Mumbai and established a city for the displaced Sindhi Hindus. Actually it was two  cities that he founded one next to the other by the names of  Gandhidham and  Adipur, as well as the Kandla Port, in Kutch.

Bhai Pratap died at the age of 59 in London on August 30, 1967. His body was brought to Adipur and cremated in the Nat Mandir
compound where his samadhi was built adjacent to the Gandhi Samadhi.

To know more about him pls read below link:

https://www.sahapedia.org/bhai-pratap-tribute-forgotten-hero

Sunday, August 30, 2020

जन गण मण राष्ट्र गान में छेड़खानी संविधान और राष्ट्रीय भावना के विरूद्ध / राष्ट्रीय सिंधी समाज


जन गण मण राष्ट्र गान में छेड़खानी संविधान और राष्ट्रीय भावना के विरूद्ध / राष्ट्रीय सिंधी समाज

दोस्तों 10 जनवरी 2005 शहीद हेमू कालानी पाक्षिक समाचार पत्र में मैंने उक्त जन गण मन के विषय में एक छोटी सी कविता लिखी थी और उसी पर संपादकीय लेख भी लिखा था कि यह विरोध दूरगामी परिणाम देंगे जो समाज के विरूद्ध होगा । 

 वास्तव में कैलाश खेर और अन्य बार-बार यह मामला उठाता है और फिर माफी मांग लेता है कि मेरे कहने का यह मतलब नहीं था । मेरे कहने का मतलब अखंड भारत से था । सिंध का भारत में विलय हो तभी सिंधु से हिन्दू होगा और अखंड भारत का सपना पूरा होगा ।

विभाजन की त्रासदी अकेले सिंधी समाज को सहनी पद रही है । पंजाबी और बंगाली समाज को उनके हिस्सै में उनका राज्य आया है इसलिये उनकी संस्कृति , बोली भाषा के सरंक्षण और संवर्धन के लिये उनके जनप्रतिनिधी निगम , विकास बोर्ड , विधानसभा,
लोकसभा , राज्य सभा , सरकारी महकमों के उच्च अधिकारी है । सिंधी समाज के पास क्या है । जिस राज्य में बसे उसी की बोली , वेशभूषा और संस्कृति को अपनाते गए और हम अपनी जड़ से अपनों से अलग होते जा रहे हैं । फिर भी सिन्धी समाज को ही बार बार  आइना दिखाया जाता है कि आप भारत में राजनैतिक सामाजिक सांस्कृतिक जमीन पर शून्य है । भारत की स्वाधीनता से लेकर प्रत्येक क्षेत्र में अमूल्य योगदान होने के बावजूद समाज के पक्ष में बोलने वाले हमारे जन प्रतिनिधियों की उपस्थिति नगण्य है । इतने सालों से
मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में सिंधियों का बहुत बड़ा योगदान है ।  70% से ज्यादा इन्वेस्टमेंट फिल्म इंडस्ट्री में सिंधी समाज का है । क्या रानी लाडी बाई का जौहर रानी पद्मिनी से कहीं भी कम है ? क्या शहीद हेमू कालानी और राजा दाहिर का इतिहास शहीद भगत सिंह और सुखदेव से कम है ? वाहियात हिन्दी फिल्मों और पार्टियों में करोड़ों फूंकने वाले भामाशाह आज सिंधी कार्यक्रमों सम्मेलनों सिंधी अखबारों की मदद करने वाले कितने हैं । क्या राजकुमार हीरानी , जी पी सिप्पी , रमेश तौरानी को कभी ख्याल नहीं आया की कोकिल कंठ भगवंती नावाणी , भगत कंवरराम , मास्टर चंद्र , राम पंजवाणी, सिन्धी इतिहास और बलिदान पर बेहतरीन हिन्दी फ़िल्में और बायोपिक बनाई जा सकती है । आज की अफसोसजनक स्थिति के लिए हम खुद जिम्मेदार हैं । व्हाट्स अप और सोशल मीडिया पर शेर दिखने वालों से मेरा नम्र आग्रह है अपने समाज और अपनें हकों कि लड़ाई आपकी अपनी है । वैचारिक मतभेद , द्वेषता हर समाज में है मगर अधिकारों की लड़ाई में वे सब एक नेता , एक एजेंडा , एक मंच पर संगठित नजर आते हैं ।
और यहां हम देख रहे हैं इन 76 सालों में ना हम सर्वमान्य नेता पैदा कर सके और ना हम  इतने सालों से सिंधी पंचायतों में अलग 2 जिलों में अलग अलग प्रदेशों में अध्यक्षों के चुनाव करवा सके हैं । एक संगठन एक नेता के अभाव में और कितना दंश सहना पड़ेगा । 

डॉ लाल थदानी महासचिव राष्ट्रीय सिंधी समाज
पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान सिन्धी अकादमी, जयपुर

Friday, August 14, 2020

सिंध स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय सिंधी समाज का वेबीनार सम्मेलन संपन्न सिंधी अकादमियों के गठन और बजट बढ़ाने की मांग उठी

सिंध स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय सिंधी समाज का वेबीनार सम्मेलन संपन्न 

सिंधी अकादमियों के गठन और बजट बढ़ाने की मांग उठी

राष्ट्रीय सिन्धी समाज द्वारा सिंध स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय सिंधी वेबीनार सम्मेलन का आयोजन किया गया  । राष्ट्रीय अध्यक्ष,  पत्रकार और सिने अभिनेता कमल वरदानी ने  सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न प्रदेशों के प्रति- निधियों से आह्वान किया कि वे अपने अपने प्रदेश में सिंधी अकादमियों के गठन और बजट बढ़ाने की मांग उठाएं ।
राष्ट्रीय महासचिव मुकेश सचदेव ,राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ लाल थदानी और बिहार सिन्धी पंचायत के नीरज जगवानी ने कहा कि भारत की आजादी के लिए हमारे सिन्धी समाज ने सिंध प्रदेश के साथ साथ व्यापार और परिवार का बहुत बड़ा बलिदान दिया है । आज 73 सालों के बाद भी हमें अपनी सिंधी बोली संस्कृति सभ्यता के सरंक्षण संवर्धन के लिए  और  सामाजिक , राजनैतिक अधिकारों के लिए  झूझना पड़ रहा है ।  सिंध प्रदेश से बिछड़ने की पीड़ा को महाराष्ट्र प्रदेश की साहित्यकार  इंदिरा पूनावाला और डॉ लाल थदानी ने अपनी लिखी हुई रचनाएं सुनाई ।
राष्ट्रीय सूत्रधार और गुजरात भाजपा के कर्मठ कार्यकर्त्ता ललित अगनानी , रत्न बाशानी (दोनों अहमदाबाद), गुल माखीजा (वडोदरा) हरीश लालवानी और मनोज कोटवानी (खण्डवा) ने शहीद हेमू कालानी को नमन किया और कहा कि 18 साल की उम्र में फांसी पर झूलने वाले नौजवान का इतिहास किसी भी रूप में , शहीद भगत सिंह से कम नहीं है ।  ललित अगनानी ने जानकारी दी के शहीद हेमू कालानी पर हिन्दी में फ़िल्म के लिए प्रयासरत हैं ।
बांसवाड़ा से अनिल मेठानी और हरीश  लखानी , छत्तीसगढ़ प्रदेश से शंकर लाल धनवानी , राधा राजपाल , गुरमुख वाधवानी ने कहा कि सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप, युटुब, ट्विटर के माध्यम से हमें राष्ट्रीय सिन्धी समाज की आवाज़ को बुलंद करना होगा ।  स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से समस्याओं के निराकरण की पहल करनी चाहिए ।
राष्ट्रीय सिंधी समाज युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार दरयानी , निर्मल मंगवानी , अशोक कालरा , मोटवानी , किशोर सैनानी , गोविंद मीरपुरी , भूमि कृपलानी ने भी सिन्धीयत सम्बन्धित विचार रखे ।

*सिंधी अकादमियों के गठन और बजट बढ़ाने की मांग उठी,*

*सिंध स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय सिंधी समाज का वेबीनार सम्मेलन संपन्न* 

*BAHUBHASHI*
*खबरों में बीकानेर 🎤📺*
https://bahubhashi.blogspot.com/2020/08/blog-post_555.html