Friday, October 19, 2018

मधुकर कहिन *आखिर डॉ लाल थदानी से चाहती क्या है राज.सरकार

#मधुकर कहिन
*आखिर डॉ लाल थदानी से चाहती क्या है राज.सरकार ?*
*एक तरफ तो थमाया गया अचार सहिंता उलंघन का नोटिस*
*वहीं स्वास्थ्य महकमे को न्यायालय द्वारा अवमानना नोटिस दिए जाने पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं*

💥नरेश राघानी💥

एक है *डॉ लाल थदानी* । आज सुबह ही अनिता भदेल के साथ साथ आचार संहिता का उल्लंघन करने हेतु थमाए गए कारण बताओ नोटिस को लेकर लगभग हर अखबार की सुर्खियां बने हुए हैं। आपको बता दें डॉ लाल *थदानी स्वास्थ्य महकमे के बहुत पुराने और वरिष्ठ अधिकारी हैं। यह बात और है कि स्वास्थ्य विभाग उनको वरिष्ठ मानने से लगातार बार बार हर बार इनकार करता रहा है ।* और *आये दिन थदानी के साथ कोई न कोई ज्यादती करता रहता है* । जिसके पीछे लाल थदानी की सामाजिक सक्रियता सबसे बड़ा कारण है। गौरतलब बात यह है कि  *लाल थदानी अजमेर उत्तर से विधायक व राजस्थान सरकार में रहे मंत्री स्वर्गीय किशन मोटवानी के बहुत करीबी लोगों में से गिने जाते थे । जिनको मोटवानी ने राजस्थान सिंधी साहित्य अकादमी का अध्यक्ष भी बनाया था* ।
सिंधी समाज में आज तक यदि किसी ने सामाजिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखी है, तो वह है डॉ लाल थदानी। *आप लोग यह सोच रहे होंगे कि मैं आपको डॉक्टर लाल थदानी का बायोडाटा बताने क्यों बैठ गया हूँ ? इसके पीछे एक सरकारी अधिकारी के अधिकारों के हनन और उसके तिरस्कार की ऐसी दर्दनाक कहानी है जिसे सब को मालूम होना अब बहुत ज़रूरी लग रहा है* । अपने अस्तित्व की लड़ाई विभाग के उच्चाधिकारियों की गलतियों के खिलाफ न्यायालय तक जारी रखे हुए डॉ लाल को सरकार न तो डॉ लाल की वरीयता अनुसार सम्मानजनक ज़िम्मेदारी देने को तैयार है , और न ही डॉ लाल की बात विभागीय स्तर पर सुनने के लिए। ऐसे में डॉ लाल के पास *न्यायालय की शरण में* जाने और *सिंधी समाज के प्रभावशाली लोगों से मदद मांगने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बच गया है* । वही डॉ लाल ने पिछले दिनों किया भी। जिस पर किस्मत खराब होने पर *ऊँट पर बैठे को कुत्ता काट लेने वाली कहावत सच होती दिखाई दे रही है* । डॉ लाल अपने समाज के लोगों के पास अपनी व्यथा कहने गए थे और वहां शिकार हो गए राजनीति के। सुनाई दिया है कि विभागीय स्तर पर वर्षों से उनके धुर विरोधी और स्वास्थ्य महकमे के एक उच्च अधिकारी वी के माथुर ने खुद ही किसी से कह कर शिकायत डलवाई है । जिस पर डॉ लाल को आचार संहिता के उलंघन का नोटीस थमा दिया गया है। अब बताइए यह भी कोई बात हुई भला यदि आदमी अपने ही समाज के लोगों के पास जाकर अपने लिए मदद ना मांगे तो कहां जाए ? अब कुछ कह नही सकते लेकिन सुनने में तो यह भी आया है कि डॉ लाल के प्रति इतना अटूट प्रेम श्री वी के माथुर का महज़ इस बात पर है कि स्व किशन मोटवानी के कार्यकाल में उन्ही की अनुशंसा से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीबी गुप्ता द्वारा डॉ लाल को कुष्ठ रोग निवारण हेतु बनाई गई सरकारी योजना का काम वी के माथुर से छीन कर सौंप दिया गया था , और माथुर का स्थांतरण कहीं दूर दराज जगह पर कर दिया था। इसी बात की गांठ मन में बांधे माथुर के सालों से डॉ लाल के खिलाफ अपने प्रभाव का उपयोग कर ना ना प्रकार की अनुशासनात्मक कार्यवाहियाँ करते आ रहे हैं। अब भाई जितने मुंह उतनी बातें किस-किस का विश्वास करें किस-किस का नहीं लेकिन एक बात तो तय है कि जिस तरह से स्वास्थ्य महकमा और उसके जुड़े हुए सरकारी अधिकारी डॉक्टर लाल के पीछे पड़े हैं उससे साफ दिखाई देता है कि सरकार में काम कम और आपसी रंजिशें ज्यादा निकाली जा रही हैं ।

जय श्री कृष्णा

नरेश राघानी
प्रधान संपादक
www.horizonhind.com
9829070307

मेरे उत्पीड़न को मन की व्यथा को आपने कलमबद्ध किया, धन्यवाद और प्रणाम ।

डॉ लाल थदानी
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सिन्धू शब्द जी उपति ऐं मूलु माना

सिन्धू शब्द जी उपति ऐं मूलु माना

ॿोली या भाषा जी सादी माना आहे -- हिक थाव-हन्ध में रहणवारनि माण्हुनिं जी सम्झ में ईंदड़ ऐं ॼातल-सुञातल माना वारे ॿोलनि जो भन्डारु माना ॿोली या भाषा ।
           सिन्धू नन्दीअ जी माना वारो ॿोलु आहे, ईहो वेदनि में बि चयलु आहे । भाषा/ॿोली ऐं भूमीअं जो हिक-ॿे सां अटूटु नातो हूंदो आहे । ॿोलीअ जे द्वारा ई उनजी भूमी या देश खे नालो मिलंदो आहे -- जेको उन भूमीअं जी नन्दीअ या कहिं ॿे आधार ते रखियलु हूंदो आहे -- इन्हं करे पंहिंजी भूमीअं जे बिना कहिं बि ॿोलीअ जी न त काई सुञाणप हूंदी आहे ऐं न ई भूमीअं जे बिना काई बि ॿोली वधिक समुह ताईं जी सघंदी आहे -- जीअं-जीअं उनजा ॻाल्हाइण-ॿोल्हाइण वारा माण्हूं, पंहिंजी ॿोलीअ जी भूमीअं खां परे थींदा वेंदा आहिनि -- तीअं-तीअं पंहिंजी ॿोलीअ खां परे थींदा वेंदा आहिनि ऐं इन्ह तरह ॿोली विञाइजंदी वेंदी आहे ऐं माण्हूं बि पंहिंजी सुञाणप विञाए छॾींदा आहिनि ।
           सभिनी माण्हुनि ऐं जीवनि जे जीआपे जो आधारु जलु हूंदो आहे -- ऐं सभखां साफु-पाकु जलु नन्दीअ जो ई हूंदो आहे, छो त नन्दी लॻातारि वहंदी रहंदी आहे -- जल रूपी नन्दीअ सां 'सन्ध्अ' माना जोड़ु थियण जे कारणि इन्हं नन्दीअ खे 'सिन्धू' नामु-नालो ॾिनो वयो ऐं जहिं भूमीअं में ईहा वहंदी हुई, उन्हंखे 'सिन्धू भूमी' नालो ॾिनो वयाे । इन्हंलाइ वेदनि में सिन्धूअ खे नदी वाचक चयो वेंदो आहे ।   
           पन्जाब जूं रावी, व्यास, झेलम, चनाब, सतलज ईहे पन्ज ऐं छहीं सरस्वती, सिन्धूअ में मिली करे सिन्धू सागर में मोक्ष-मिकिती पाईदियूं आहिनि -- इन्हंकरे इन्हंनि सतनीं नन्दिनि जी  पूरी पखेड़-खेत्र खे "सप्त सैन्धव देशु" चयो वयाे ।
           सिन्धू शब्द जी मूलु क्रिया 'सन्ध्अ' करिणु माना सन्धी करिणु आहे --इन्हंजी उबितड़ि माना वारो शब्दु आहे 'सन्धो' माना भेदु -- इन्हं जे आधार ते ई बणियलु शब्दु आहे 'सांदहि' (ध = द+ह) माना लॻातारि ।
        
प्रेम तनवाणी - 9685943880
संकलित
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Thursday, October 18, 2018

सिंधियत - पुठिते हटन्दड़ कदम* एस पी सर [मंघिरमलानी]

*सिंधियत - पुठिते हटन्दड़ कदम*
एस पी सर [मंघिरमलानी]
संक: डॉ लाल थदानी 8005529714

अजु भारत जे सिंधी समाज जी वड़ी चिंता आहे त सिंधियत तरकी जी राह जी जगह ते खातमे जी राह ते कदम वधाये रही आहे। केतिरा इहो सोचिन था सिंधी भाषा जो उपयोग घटिजण उहो सबब आहे जहिं करे सिंधियत जा कदम खातमे जी राह ते पिया आहिन पर हकीकत इहा आहे त सिंधियत जे कमज़ोर थियण सबब सिंधी भाषा जो उपयोग घटिजंदो थो वञे। 
सिंधियत आखिर आहे छा ? सिंधियत उहो आयनो आहे जहिं में सिंधी समाज पहिंजी सामाजिक हलत जा अकस डिसी सघे थो।  सिंधियत उहे वट आहिन जिन में सिंधी समाज पहिंजी कामियाबी या नाकामियाबी तोरे सघे थो। सिंधियत समाज में मौजूद उहा लचकेदारी आहे जेका काबिलियत खे मुनासिब मान वारी मंज़िल हासिल करण में राह रहबरी करे थी। सिंधियत सामाजिक कायदन खे स्थिर [कायम ऐं दायम ] रखण जी उहा भावना आहे जेका सामाजिक हलत खे सही राह ते रखी, सामाजिक एकता में वाधि आणे समाज खे तरकीयाफ्ता बणाए थी। 
हकीकत में लचकेदारी ऐं दायम कायम हुजण इहे बुनियाद आहिन जिन ते कहिं बि समाज जी कामियाबी जी इमारत ठहे थी। बदकिस्मती सां सिंधी समाज में लचकेदारी तोड़े स्थिरता जी अणाठ तरकी पयी करे थी नतीजे तोर सिंधियत खातमे जी राह ते पयी थी वधे। अचो त हाणे इहो समझण जी कोशिश कयूं त इन्हन बिन्ही जी अणाठ सिंधी समाज जी एकता ऐं सिंधियत जे वाधारे ते कहिड़ा ऐं कीयं असर किया आहिन। 
समाज जी लचकेदारी शख्सन खे मोको डिये थी त उहे पहिंजी क़ाबलियत ऐं सलाहियत जे आधार ते समाज में मान वारो ओहदो हासिल करे सघन। हाणे जे गुजिरियल सतर सालन जो विचार कजे त सिंधी सामाजिक संस्थाउन में ओहदो काबलियत जे आधार ते न पर विरसे में हासिल थियण जो सिलसिलो शुरू आहे। किन हंदन ते त खास करे सिंधी पंचायतुन में इहो फखुर सां चयो वेन्दो आहे त शुरुआत में मुहिंजो डाडो मुखी हुओ पोय वीह साल पिता साहिब जन हुआ ऐं उन्हन जे स्वर्गवास खां पोय गुजिरियल पंजन सालन खां वठी मां मुखी आहियां। इतिहास गवाह आहे त इहो विरसे में ओहदा मिलण कहिं बि समाज खे तरकीयाफ्ता कोन बणाए सघियो आहे। सिंधी कौम में त इन विरसे में ओहदो मिलण जो हिकु बियो असर बि नज़र आयो ऐं उहो हो क़ाबलियत जो नयीं सामाजिक संस्था बरपा करण। शायद इहा सिंधी कौम जी बदकिस्मती आहे जो गुजिरियल बिन ट्रिन डहाकन खां सामाजिक संस्था जी शुरुआत जो सबब काबिलियत न पर बिया सबब थी पिया आहिन। कहिं बि समाज में वधीक सामाजिक संस्थाउं समाज जी एकता जी बुनियाद खे डांवाडोल करण जो कमु कनि थियूं छु जो इन सबब सामाजिक सलाहियतुन जी विरहासत थिये थी। सिंधी समाज जी हालत में इहो असर वधीक चिट्रो नज़र अचे थो छो जो सिंधी समाज आदमशुमारी जे लिहाज़ खां त थोरायी में आहे ई पर गडोगडु भारत जे अलग अलग शहरन में अलग अलग पसगिरदायी वारे माहोल में बि रहे थो। 
सागे नमूने सिंधी समाज में सामाजिक रुतिबे, इज़त मान जो लागापो शख्स जी सामाजिक कमन वास्ते चाहत ऐं सलाहियत सां न पर पेसे सां जोड़े डिसण जे नज़रिये खे वड़े पैमाने ते सामाजिक मंज़ूरी मिलण जो सिलसिलो शुरू आहे। पेसो सामाजिक कमन जी कामियाबी वास्ते हिक ज़रूरत ज़रूर आहे पर इहो सलाहियत जी जगह वठी सघे इहो मुमकिन न आहे।
इन्हन सभनी जो गडियिल असर इहो आहे त सिंधी समाज मां आहिस्ते आहिस्ते ई सही पर सिलसिलेवार सामाजिकता घटिजी रही आहे नतीजे तोर न सिर्फ सिंधी समाज में एकता जी अणाठ थी नज़र अचे पर सिंधियत जे खातमे जी राह ते कदम रखण सबब सिंधी भाषा जो वज़ूद पिण खतरे में महसूस थिये थो। 
  
गांधीनगर कोल्हापुर
14 October 2018

Thursday, October 11, 2018

आसूचण्ड महोत्सव  और आसकरण का 75 वां जन्मदिन मनाया

आसूचण्ड महोत्सव  और
आसकरण का 75 वां जन्मदिन मनाया

सिंधु सत्कार समिति द्वारा आसूचण्ड महोत्सव के उपलक्ष्य पर बहिराणा साहिब फेरी के आयोजन के अलावा समिति के पूर्व अध्यक्ष और मदार गेट व्यापार एसोसिएशन के संरक्षक आसकरण केसवानी का 75 वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया । समिति संरक्षक दीपक हासानी ने केसवानी जी को पखरु पहनाकर और माल्यार्पण कर स्वागत किया ।अध्यक्ष राजेश आनंद और संस्थापक डॉ लाल थदानी के अलावा नारायण दास नागरानी, मोती जेठानी , वासुदेव सोनी, वासुदेव जेठानी, रूपकुमार, अजय शिवनानी, देवीदास साजनानी, गिरीश लालवानी, गिरीश आसनानी ,आशु चेलानी,अनिल केसवानी,दौलत लालवानी,और व्यापार मंडल के समस्त सदस्यों ने  हैप्पी बर्थ डे टू यू गीत के साथ केक काटकर स्वस्थ और दीर्घायु की मनोकामना के साथ
जन्मदिन मनाया ।

Saturday, October 6, 2018

नकारात्मक सोच से समाज का अहित ही होता है । डॉ लाल थदानी

         काश मैं कुछ कर पाता
नकारात्मक सोच से समाज का अहित ही होता है ।
डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष
राज. सिन्धी अकादमी,जयपुर ।
संस्थापक सिन्धु सत्कार समिति अजमेर ।

मेरा एक पत्रकार मित्र हैं जो अक्सर मेरी तारीफ करता है यार डॉक साब सिन्धी समाज में जब भी इंकलाबी का जिक्र होगा आपको याद जरूर किया जाएगा । हर सिन्धी सम्मेलन के लिए हमेशा न्यौता आता है लेकिन नौकरी और परिवार मेरी प्राथमिकता है और जरूरत भी । इसलिए जाना संभव नहीं होता ।
कुछ दिन पहले एक सेल्फी मास्टर ने मुझसे आग्रह किया कि उसका नाम पैनल में है और मैं उसे समर्थन दूं । जब भी चुनाव आते हैं सिन्धी गैर सिन्धी का मुद्दा अजमेर की इस अघोषित सिन्धी सीट पर शुरू हो जाता है । आप पूरे 5 साल नेपथ्य में रहो और अचानक किसी का बी काम्प्लेक्स का इंजेक्शन मिलते ही खिलौने की तरह उछलकूद मचाओ कि मैं एमएलए क्यों नहीं । भैया मेरे में क्या कमी है । उनको ईश्वर सदबुद्धि दे कि भाई वो जमाने गए । हर किसी की किस्मत नानकराम जैसी नहीं हो सकती । उनकी झोली में भी टिकट यूँ ही नहीं गिरा । वे गरीबों के मसीहा थे और पार्षद भी । गहलोत सरकार की मेहरबानी से जीत भी गए । इनके एक सिन्धी भाऊ रणनीतिकार थे । मैं आज भी इनके ज्ञान और स्पष्टवाद का कायल हूं । किसी जमाने में आपने और अशोक गहलोत जी ने सेवादल से राजनीति शुरू की मगर आज वो प्रधानमंत्री की दौड़ में आ गए है । और मेरा मित्र  लोगों को निपटाते 2 अपने दायरे मे भी सिमट नहीं पा रहे हैं। नकारात्मक सोच से आप कभी आगे नहीं बढ़ सकते । ये तय है ।
शहीद हेमू कालानी की विशाल रैलियों का आयोजन करने का सबसे पहला श्रेय मुझे और मेरी सिन्धु सत्कार समिति को प्राप्त है । उस समय अजमेर के सांसद भगवान देव आचार्य ने मुझे भी बी काम्प्लेक्स का इंजेक्शन लगाने की कोशिश की डॉ साब इतने सालों तक आप कहाँ थे । मेरे साथ दिल्ली चलो अजमेर पश्चिम से आपकी टिकट पक्की । मैंने भी हाथ जोड़े । मैं सिन्धी हूँ । जब तक किशन मोटवानी जिंदा है मैं सोचूंगा भी नहीं । अगले सत्र में मोटवानी जी राजस्व मंत्री बने और मुझे सिन्धी अकादमी के अध्यक्ष पद कैसे मिला उसकी चर्चा अगले सत्र में । मेरी इस प्रार्थना के साथ कि आपका भविष्य , सिन्धी समाज का और सिन्धी बोली, सभ्यता और संस्कृति का भविष्य आपके हाथ में है ।
आप दौड़े, अवश्य दौड़े । मगर अपने बलबूते पर । किसी की दी हुई बी काम्प्लेक्स इंजेक्शन के असर से मत दौड़ें ।
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की मनाही नहीं है ।  समाज इतना लाचार भी नहीं कि किसी और को हमारे ही ख़िलाफ़ ज़हर उगलने की इजाज़त दे और सहन करें।
हर बार मैं और मेरे मित्र पत्रकार नरेश राघानी (कवि मधुकर) की भी दावेदारी रही है मगर इस बार हमने सिन्धी समाज का हित सोचा और शुरू से  एक सिन्धी की मांग की है । हम अपने निर्णय पर अडिग हैं और समाज हित में पुनः एक नसीयत देना  चाहेंगे  कि किसी भी संगठन की सफ़लता ,समाज हित और एकता के 10 मूल मंत्र हमेशा याद रखें  ...

1. संगठन और समाज के लिए मिलकर
    लड़ाई लड़ो ।
2. लड़ नही सकते तो लिखो ।
3. लिख नही सकते तो बोलो ।
4. बोल नहीं सकते तो साथ दो ।
5. समाज के जयचंदों को पहचानो ।
6. समझाकर इन्हें मुख्य धारा में लाओ  
   और आम सहमति के लिए राजी करो ।
7. साथ भी नहीं दे सकते तो जो
    लिख और बोल रहे हैं ,लड़ रहे हैं,
    उनका अधिक से अधिक सहयोग करें ।  8. ये भी न कर सकें तो कम से कम मनोबल
    न गिरायें । क्योकि कहीं न कहीं कोई
   आपके हिस्से की भी वे लड़ाई लड़ रहें हैं । 9. वे समाज हित में लड़ते आये है , लड़ते
    रहेंगे । हम सब के लिए लड़ेंगे और
    जीतेंगे ।
10. संगठन और समाज आपसे है, आपका है,संघर्ष के  लिए ताकत दें ।
  
नकारात्मक सोच से समाज का अहित ही होता है । काश मेरा समाज इतना खोने के बाद अब तो संभले । काश मेरे साथी मेरी भावनाओं को समझ पाते । काश  मैं कुछ कर पाता ।।।

असांजी नादानी सां असीं सिन्ध विन्याई
सिन्धी बोली भि बचाइण थी मुश्किल
कुछ समझण न अचे त हिक ही राग गायूँ
वाह रे सिन्धी वाह
हे आयोलाल सभई चओ झूलेलाल ।

डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष
राज. सिन्धी अकादमी,जयपुर ।
संस्थापक सिन्धु सत्कार समिति अजमेर ।

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Thursday, October 4, 2018

महालक्ष्मी जी कथा/ अठों श्राद्ध


🔥  *सिंधियत जी जोति*                 
      🌹 *महालक्ष्मी जी कथा * 🌹
       
                अजु॒ असांजो सिंधी डि॒णु महालक्ष्मी आहे. इहो डि॒णु अठें श्राद्ध  ते मल्हायो वेंदो आहे. असां डि॒सी रहिया आहियूं त अजु॒ जी *नईं ठही*(पीढ़ी), असांजे *सिंधी रीति-रिवाजनि* खां परे थींदी थी वञे , छाकाणि त उन्हनि डि॒णनि खे असांजो *सिंधी समाज* छो मल्हाईंदो आहे इनजी जा॒ण ई कोन आहे. हीउ डि॒णु *माता लक्ष्मी* जी कृपा दृष्टि परिवार जे मथां बणिजी रहे इन करे मल्हायो वेंदो आहे. हिन डि॒ण जी *हिक कथा* आहे ,उहा अव्हांजे साम्हूं रखणु चाहींदसि...

                   🙏🏻  *कथा* 🙏🏻
     
                   *हिक राजा* खे कहिं *दरवेश* हिकु *पीलो धागो॒ (सग॒ड़ो )* डि॒नो .उहो सग॒ड़ो खणी *राजा महल* में आयो ऐं *राणीअ* खे डे॒ई करे हथ में ब॒धण लाइ चयो. राणीअ उहो सग॒ड़ो फिटी करे छडि॒यो. उहो ई सग॒ड़ो महल जी *नौकराणी* खणी मथे ते लगा॒ए हथ में ब॒धियो .
              राणीअ सग॒ड़े जो अपमानु कयो त उहा *होरियां-होरियां गरीबु* थींदी वई ऐं उन जे मथां *हार जी चोरीअ जो डो॒हु* बि लगो॒ , राजा उनखे महल मां बा॒हिर कढी छडि॒यो. उते ई नौकराणीअ सग॒ड़े खे सम्मान डि॒नो त उन वटि अपार धन-दौलत अची वेई ऐं उहा महाराणीअ वांगु॒र जीवनु जीअण लगी॒.
              राणी दुखी मन सां *जंगल* मे हली वई , *उन जा पेर जिते पवनि पया उतां जा वण , खूअ, नदियूं सब सुकी विया.जंगल में हिक झूपड़ीअ में राणी रहण लगी॒ , हिकु संत घुमंदे -घुमंदे राणीअ वटि पहुंतो*, राणीअ खे डि॒सी हू सबु समुझी वयो. हुन राणीअ खे सग॒ड़ो डि॒नो , राणी उन सग॒ड़े खे सम्मान सां हथ ते ब॒धियो. हुन *संत राणीअ खे अक्खो ( खीरु ऐं मिश्रीअ जो घोलु )* डि॒नो एं चयो त तूं महिल में मोटी वञु , तुहिंजो धन-वैभव मोटी मिलंदो ऐं मोटंदे वक्तु हिन अक्खे जा *छंडा* हणंदी वञु .
                 राणीअ संत जी गा॒ल्हि मञी करे छंडो हयों त सभेई वण सावा थी वया .खूअ, नदियूं पाणीअ सां भरिजी वया, जेको हारु चोरी थियो हो उहो मोटी मिलयो ऐं राणीअ खे पहिंजो सन्मानु बि मोटी मिलयो.
             असां इन करे अजु॒ बि *महालक्ष्मीअ*  जो डि॒णु वडे॒ श्रद्धा भाव सां मल्हाईंदा आहियूं. हिन डीं॒हं ते घर मे तरह-तरह जा पकवान ऐं मिठायूं ठहंदियूं आहिनि. शाम जो सग॒ड़ो छोड़े करे हिक पूड़ीअ जे मथां ब॒धी करे *महाराज स्वामीअ ( ब्राह्मण देवता )* खां कथा बु॒धी असां हिन डि॒ण खे पूरो कंदा आहियूं .
              त अचो दोस्तउ असां सभेई गडि॒जी करे सिंधी डि॒ण मल्हायूं , असांजे सिंधी रीति - रिवाजनि सां ई असांजी सिंधियत कायमु आहे. जे असां सिंधी संस्कृति ऐं सभ्यता खां परे थींदासीं त असांजे बा॒रनि खे सिंधी हुअण ते गर्वु कीअं थींदो ?
           *सभेई प्यार सां चओ "महालक्ष्मी माता जी जय"*.........          
               3.10.2018
                ✍🏻 *तमन्ना मतलानी*
                            *गोंदिया*
                       *०२/१०/२०१८*