Saturday, August 24, 2019
23 अगस्त थदड़ी पर्व मनाया
Friday, April 12, 2019
अमर शहीद संत कंवर राम साहिब / डॉ लाल थदानी
अमर शहीद संत कंवर राम साहिब जी की जय / डॉ लाल थदानी
संत कंवरराम साहेब जी का *जन्म 13 अप्रैल 1885* को सिंध प्रांत में *जरवार ग्राम में* हुआ था। उनके पिता का नाम ताराचंद तथा माता का नाम तीर्थबाई था। संत कंवरराम साहेब जी के गुरु का नाम श्री सतराम दास साहिब जी था। बाल्यावस्था से ही इनकी रुचि भजन कीर्तन,गायन व भक्ति भाव मे थी। रोजगार व उदरपूर्ति हेतु इनकी माता इन्हें प्रतिदिन चने (सिन्धी मे कोंहर बोलते हैं ) उबालकर विक्रय हेतू दिया करती थीं। तब ये नन्हा-सा बालक भक्ति भरे भाव से प्रभु की महिमा का गुणगान करता हुआ चने बेचता था। एक दिन इनकी मधुर ध्वनि सुनकर गुरु सतरामदास ने इन्हें अपने समक्ष बुलाया और भजन सुनाने के लिए कहा।तत्पश्चात् रहिड़की के प्रसिध्द दरबार मे इन्हें स्वीकार कर लिया गया और महाज्ञानी संगीतज्ञ श्री हासाराम जी से संगीत की शिक्षा ग्रहण की साथ ही अपने गुरु साईं सतरामदास साहेब जी की छत्रछाया में बहुत ज्ञानवान हो गए। गुरु की मृत्यु के पश्चात उनका सारा कार्यभार संत कंवरराम जी के कंधों पर आ पड़ा ।संत कंवरराम साहेब जी गांव - गांव जाकर भक्ति के माध्यम से ईश्वर वंदना करने लगे ।
एक बार सिंध के सख्खर जिले में महात्मा गांधी जी पधारे । गांधी जी वहां पहली बार पधारे थे, इसलिए उनका दर्शन करने तथा भाषण सुनने के लिए लाखों लोग एकत्रित हो गए । भीड़ के कारण वहां बहुत शोर हो रहा था ।मंच पर उपस्थित नेताओं के प्रयत्न करने से भी शोर शांत नहीं हुआ। तब मंच पर उपस्थित नेताओं ने सामने पंक्ति में बैठे संत कंवर राम साहिब जी को देखा और गांधी जी से आज्ञा लेकर उन्हें निवेदन किया कि आप इस शोर को शांत कीजिए । जैसे ही लोकप्रिय कंठ के धनी इस महान संत ने माईक पर आकर लोगों से शांत रहने की अपील की तो पल भर में ही सारा शोर शांत हो गया ।तब गांधीजी ने भी इस लाड़ले संत की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
मानव सेवा ही संत कंवर राम साहिब जी का मुख्य ध्येय था । अपंगो, नेत्रहीनो एवं रोगियों की सेवा अपने हाथों से करके वे स्वयं को धन्य मानते थे ।
एक बार सत्संग करते समय एक महिला ने अपने मृत नवजात शिशु को संत की झोली में डाल दिया। केवल महिला ही जानती थी कि बच्चा मर चुका है पर जैसे ही संत कंवर राम साहिब जी ने उस बच्चे को गोद में लेकर लोरी गाई तो वह मृत बच्चा जीवित हो गया ।महिला रोते हुए संत के चरणों में गिर पड़ी ।बाद में उस महिला ने वहां उपस्थित सभी लोगों को अपने साथ हुए चमत्कार के बारे में बताया तो सभी लोग अचंभित हो उठे।
संत कंवर राम जी का सदैव एकता और भाईचारे का प्रचार करते थे । सांप्रदायिक भाईचारे के विरोधी एक पीर ने अपने अनुयायियों को इस संत के खिलाफ भड़काया । एक दिन भजन के पश्चात अपनी भजन-मंडली के साथ एक जब संत कंवरराम जी *रुक रेलवे स्टेशन* पर पहुंचे, तब दो बंदूकधारियों ने उनको आकर प्रणाम किया और कार्य सिद्धि के लिए संत जी से दुआ मांगी । गाड़ी चलते ही उन लोगों ने संत कंवरराम जी को( *1 नवंबर 1939 को* ) के दिन गोली मार दी । सर्वधर्म समभाव का ध्वज फहराने वाले मानवता के इस मसीहा ने प्राण त्याग दिए ।उनके शहीद होने की खबर लगते ही सिंध प्रांत के सभी स्कूल, कॉलेज, ऑफिस और बाजार बंद हो गए। दीपावली के त्यौहार में उस वर्ष पूरे प्रांत में दीपक नहीं जलाए गए ।
अमर शहीद संत कंवरराम साहेब जी की स्मृति में *1940* से संपूर्ण देश और विदेश में उनकी जयंती व पुण्यतिथि मनाई जा रही है। उनकी स्मृति में सिंधी समाज द्वारा गठित धर्मशालाएं, गौशालाएं, शिक्षण -संस्थाएं ,अस्पताल, विधवा -आश्रम आज भी सुचारू रूप से चल रहे हैं ।
*ऐसे महान सत्पुरुष को संपूर्ण राष्ट्र का शत शत नमन*🙏🏻🙏🏻
Sunday, January 13, 2019
मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय झूलेलाल
सभिनीन सुहिणन सिंधयुन खे
साल २०१९ जे पहिंरे डिण
लाल लोई ऐं तिरमुरी जूं बेशुमार वाधायूं । सिंधीयत कायम रखो
शल मिठा थियो मिठा रहो ।
सभई सदाई खुश हुजो ।
मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।
💐🇮🇳 उत्तरायण का सूर्य आपके स्वपनों को नई ऊष्मा प्रदान करे, आपके यश एवं कीर्ति में उत्तरोत्तर व्रद्धि हो, उमंग एवं शुभ कार्य पुनः प्रारम्भ हो ।
मैं कामना करता हूँ कि यह त्योहार आपके जीवन में हर्षोल्लास एवं ढेर सारी खुशियाँ लेकर आए ||
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Sunday, December 16, 2018
मां सिन्धी आयां डॉ लाल थदानी
रोज व्हाट्स एप्प पर सिन्धियत कम मोदी राहुल पर टिपणियों से उद्वेलित होकर मेरे मन के भाव व्यक्त किये हैं । क्या मेरे सिन्धी भाई बहन थोड़ा वक्त सिन्धियत के प्रचार प्रसार में नहीं लगा सकते । अगर आप सहमत हैं तो अधिक से अधिक आप मेरी आवाज बने ।
हा मां सिन्धी आयां
भारत देश जी बिंदी आयां
देश जी आन, बान, शान, बुधायां
राष्ट्र जी अखंडता लाए कुर्बां सद्दायां
कांग्रेस न जाणां भाजपा न सुञ्यांणा
सिंन्धी बोली, संस्कृति, सभ्यता खे जा्णां
मुहिंजी अखु् सिंन्धी डिसे
मुहिंजो कन सिंन्धी बु्धे
मां हेमूं , ढा्हर, झूलण जो वंश वधायां
छो त मां सिन्धी आयां
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डॉ लाल थदानी #अल्फ़ाज़_दिलसे
महासचिव
राष्ट्रीय सिन्धी समाज
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16.12.2018 1st
05.03.2022 2nd
Friday, October 19, 2018
मधुकर कहिन *आखिर डॉ लाल थदानी से चाहती क्या है राज.सरकार
#मधुकर कहिन
*आखिर डॉ लाल थदानी से चाहती क्या है राज.सरकार ?*
*एक तरफ तो थमाया गया अचार सहिंता उलंघन का नोटिस*
*वहीं स्वास्थ्य महकमे को न्यायालय द्वारा अवमानना नोटिस दिए जाने पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं*
💥नरेश राघानी💥
एक है *डॉ लाल थदानी* । आज सुबह ही अनिता भदेल के साथ साथ आचार संहिता का उल्लंघन करने हेतु थमाए गए कारण बताओ नोटिस को लेकर लगभग हर अखबार की सुर्खियां बने हुए हैं। आपको बता दें डॉ लाल *थदानी स्वास्थ्य महकमे के बहुत पुराने और वरिष्ठ अधिकारी हैं। यह बात और है कि स्वास्थ्य विभाग उनको वरिष्ठ मानने से लगातार बार बार हर बार इनकार करता रहा है ।* और *आये दिन थदानी के साथ कोई न कोई ज्यादती करता रहता है* । जिसके पीछे लाल थदानी की सामाजिक सक्रियता सबसे बड़ा कारण है। गौरतलब बात यह है कि *लाल थदानी अजमेर उत्तर से विधायक व राजस्थान सरकार में रहे मंत्री स्वर्गीय किशन मोटवानी के बहुत करीबी लोगों में से गिने जाते थे । जिनको मोटवानी ने राजस्थान सिंधी साहित्य अकादमी का अध्यक्ष भी बनाया था* ।
सिंधी समाज में आज तक यदि किसी ने सामाजिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखी है, तो वह है डॉ लाल थदानी। *आप लोग यह सोच रहे होंगे कि मैं आपको डॉक्टर लाल थदानी का बायोडाटा बताने क्यों बैठ गया हूँ ? इसके पीछे एक सरकारी अधिकारी के अधिकारों के हनन और उसके तिरस्कार की ऐसी दर्दनाक कहानी है जिसे सब को मालूम होना अब बहुत ज़रूरी लग रहा है* । अपने अस्तित्व की लड़ाई विभाग के उच्चाधिकारियों की गलतियों के खिलाफ न्यायालय तक जारी रखे हुए डॉ लाल को सरकार न तो डॉ लाल की वरीयता अनुसार सम्मानजनक ज़िम्मेदारी देने को तैयार है , और न ही डॉ लाल की बात विभागीय स्तर पर सुनने के लिए। ऐसे में डॉ लाल के पास *न्यायालय की शरण में* जाने और *सिंधी समाज के प्रभावशाली लोगों से मदद मांगने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बच गया है* । वही डॉ लाल ने पिछले दिनों किया भी। जिस पर किस्मत खराब होने पर *ऊँट पर बैठे को कुत्ता काट लेने वाली कहावत सच होती दिखाई दे रही है* । डॉ लाल अपने समाज के लोगों के पास अपनी व्यथा कहने गए थे और वहां शिकार हो गए राजनीति के। सुनाई दिया है कि विभागीय स्तर पर वर्षों से उनके धुर विरोधी और स्वास्थ्य महकमे के एक उच्च अधिकारी वी के माथुर ने खुद ही किसी से कह कर शिकायत डलवाई है । जिस पर डॉ लाल को आचार संहिता के उलंघन का नोटीस थमा दिया गया है। अब बताइए यह भी कोई बात हुई भला यदि आदमी अपने ही समाज के लोगों के पास जाकर अपने लिए मदद ना मांगे तो कहां जाए ? अब कुछ कह नही सकते लेकिन सुनने में तो यह भी आया है कि डॉ लाल के प्रति इतना अटूट प्रेम श्री वी के माथुर का महज़ इस बात पर है कि स्व किशन मोटवानी के कार्यकाल में उन्ही की अनुशंसा से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीबी गुप्ता द्वारा डॉ लाल को कुष्ठ रोग निवारण हेतु बनाई गई सरकारी योजना का काम वी के माथुर से छीन कर सौंप दिया गया था , और माथुर का स्थांतरण कहीं दूर दराज जगह पर कर दिया था। इसी बात की गांठ मन में बांधे माथुर के सालों से डॉ लाल के खिलाफ अपने प्रभाव का उपयोग कर ना ना प्रकार की अनुशासनात्मक कार्यवाहियाँ करते आ रहे हैं। अब भाई जितने मुंह उतनी बातें किस-किस का विश्वास करें किस-किस का नहीं लेकिन एक बात तो तय है कि जिस तरह से स्वास्थ्य महकमा और उसके जुड़े हुए सरकारी अधिकारी डॉक्टर लाल के पीछे पड़े हैं उससे साफ दिखाई देता है कि सरकार में काम कम और आपसी रंजिशें ज्यादा निकाली जा रही हैं ।
जय श्री कृष्णा
नरेश राघानी
प्रधान संपादक
www.horizonhind.com
9829070307
मेरे उत्पीड़न को मन की व्यथा को आपने कलमबद्ध किया, धन्यवाद और प्रणाम ।
डॉ लाल थदानी
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सिन्धू शब्द जी उपति ऐं मूलु माना
सिन्धू शब्द जी उपति ऐं मूलु माना
ॿोली या भाषा जी सादी माना आहे -- हिक थाव-हन्ध में रहणवारनि माण्हुनिं जी सम्झ में ईंदड़ ऐं ॼातल-सुञातल माना वारे ॿोलनि जो भन्डारु माना ॿोली या भाषा ।
सिन्धू नन्दीअ जी माना वारो ॿोलु आहे, ईहो वेदनि में बि चयलु आहे । भाषा/ॿोली ऐं भूमीअं जो हिक-ॿे सां अटूटु नातो हूंदो आहे । ॿोलीअ जे द्वारा ई उनजी भूमी या देश खे नालो मिलंदो आहे -- जेको उन भूमीअं जी नन्दीअ या कहिं ॿे आधार ते रखियलु हूंदो आहे -- इन्हं करे पंहिंजी भूमीअं जे बिना कहिं बि ॿोलीअ जी न त काई सुञाणप हूंदी आहे ऐं न ई भूमीअं जे बिना काई बि ॿोली वधिक समुह ताईं जी सघंदी आहे -- जीअं-जीअं उनजा ॻाल्हाइण-ॿोल्हाइण वारा माण्हूं, पंहिंजी ॿोलीअ जी भूमीअं खां परे थींदा वेंदा आहिनि -- तीअं-तीअं पंहिंजी ॿोलीअ खां परे थींदा वेंदा आहिनि ऐं इन्ह तरह ॿोली विञाइजंदी वेंदी आहे ऐं माण्हूं बि पंहिंजी सुञाणप विञाए छॾींदा आहिनि ।
सभिनी माण्हुनि ऐं जीवनि जे जीआपे जो आधारु जलु हूंदो आहे -- ऐं सभखां साफु-पाकु जलु नन्दीअ जो ई हूंदो आहे, छो त नन्दी लॻातारि वहंदी रहंदी आहे -- जल रूपी नन्दीअ सां 'सन्ध्अ' माना जोड़ु थियण जे कारणि इन्हं नन्दीअ खे 'सिन्धू' नामु-नालो ॾिनो वयो ऐं जहिं भूमीअं में ईहा वहंदी हुई, उन्हंखे 'सिन्धू भूमी' नालो ॾिनो वयाे । इन्हंलाइ वेदनि में सिन्धूअ खे नदी वाचक चयो वेंदो आहे ।
पन्जाब जूं रावी, व्यास, झेलम, चनाब, सतलज ईहे पन्ज ऐं छहीं सरस्वती, सिन्धूअ में मिली करे सिन्धू सागर में मोक्ष-मिकिती पाईदियूं आहिनि -- इन्हंकरे इन्हंनि सतनीं नन्दिनि जी पूरी पखेड़-खेत्र खे "सप्त सैन्धव देशु" चयो वयाे ।
सिन्धू शब्द जी मूलु क्रिया 'सन्ध्अ' करिणु माना सन्धी करिणु आहे --इन्हंजी उबितड़ि माना वारो शब्दु आहे 'सन्धो' माना भेदु -- इन्हं जे आधार ते ई बणियलु शब्दु आहे 'सांदहि' (ध = द+ह) माना लॻातारि ।
प्रेम तनवाणी - 9685943880
संकलित
डॉ लाल थदानी 8005529714
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Thursday, October 18, 2018
सिंधियत - पुठिते हटन्दड़ कदम* एस पी सर [मंघिरमलानी]
*सिंधियत - पुठिते हटन्दड़ कदम*
एस पी सर [मंघिरमलानी]
संक: डॉ लाल थदानी 8005529714
अजु भारत जे सिंधी समाज जी वड़ी चिंता आहे त सिंधियत तरकी जी राह जी जगह ते खातमे जी राह ते कदम वधाये रही आहे। केतिरा इहो सोचिन था सिंधी भाषा जो उपयोग घटिजण उहो सबब आहे जहिं करे सिंधियत जा कदम खातमे जी राह ते पिया आहिन पर हकीकत इहा आहे त सिंधियत जे कमज़ोर थियण सबब सिंधी भाषा जो उपयोग घटिजंदो थो वञे।
सिंधियत आखिर आहे छा ? सिंधियत उहो आयनो आहे जहिं में सिंधी समाज पहिंजी सामाजिक हलत जा अकस डिसी सघे थो। सिंधियत उहे वट आहिन जिन में सिंधी समाज पहिंजी कामियाबी या नाकामियाबी तोरे सघे थो। सिंधियत समाज में मौजूद उहा लचकेदारी आहे जेका काबिलियत खे मुनासिब मान वारी मंज़िल हासिल करण में राह रहबरी करे थी। सिंधियत सामाजिक कायदन खे स्थिर [कायम ऐं दायम ] रखण जी उहा भावना आहे जेका सामाजिक हलत खे सही राह ते रखी, सामाजिक एकता में वाधि आणे समाज खे तरकीयाफ्ता बणाए थी।
हकीकत में लचकेदारी ऐं दायम कायम हुजण इहे बुनियाद आहिन जिन ते कहिं बि समाज जी कामियाबी जी इमारत ठहे थी। बदकिस्मती सां सिंधी समाज में लचकेदारी तोड़े स्थिरता जी अणाठ तरकी पयी करे थी नतीजे तोर सिंधियत खातमे जी राह ते पयी थी वधे। अचो त हाणे इहो समझण जी कोशिश कयूं त इन्हन बिन्ही जी अणाठ सिंधी समाज जी एकता ऐं सिंधियत जे वाधारे ते कहिड़ा ऐं कीयं असर किया आहिन।
समाज जी लचकेदारी शख्सन खे मोको डिये थी त उहे पहिंजी क़ाबलियत ऐं सलाहियत जे आधार ते समाज में मान वारो ओहदो हासिल करे सघन। हाणे जे गुजिरियल सतर सालन जो विचार कजे त सिंधी सामाजिक संस्थाउन में ओहदो काबलियत जे आधार ते न पर विरसे में हासिल थियण जो सिलसिलो शुरू आहे। किन हंदन ते त खास करे सिंधी पंचायतुन में इहो फखुर सां चयो वेन्दो आहे त शुरुआत में मुहिंजो डाडो मुखी हुओ पोय वीह साल पिता साहिब जन हुआ ऐं उन्हन जे स्वर्गवास खां पोय गुजिरियल पंजन सालन खां वठी मां मुखी आहियां। इतिहास गवाह आहे त इहो विरसे में ओहदा मिलण कहिं बि समाज खे तरकीयाफ्ता कोन बणाए सघियो आहे। सिंधी कौम में त इन विरसे में ओहदो मिलण जो हिकु बियो असर बि नज़र आयो ऐं उहो हो क़ाबलियत जो नयीं सामाजिक संस्था बरपा करण। शायद इहा सिंधी कौम जी बदकिस्मती आहे जो गुजिरियल बिन ट्रिन डहाकन खां सामाजिक संस्था जी शुरुआत जो सबब काबिलियत न पर बिया सबब थी पिया आहिन। कहिं बि समाज में वधीक सामाजिक संस्थाउं समाज जी एकता जी बुनियाद खे डांवाडोल करण जो कमु कनि थियूं छु जो इन सबब सामाजिक सलाहियतुन जी विरहासत थिये थी। सिंधी समाज जी हालत में इहो असर वधीक चिट्रो नज़र अचे थो छो जो सिंधी समाज आदमशुमारी जे लिहाज़ खां त थोरायी में आहे ई पर गडोगडु भारत जे अलग अलग शहरन में अलग अलग पसगिरदायी वारे माहोल में बि रहे थो।
सागे नमूने सिंधी समाज में सामाजिक रुतिबे, इज़त मान जो लागापो शख्स जी सामाजिक कमन वास्ते चाहत ऐं सलाहियत सां न पर पेसे सां जोड़े डिसण जे नज़रिये खे वड़े पैमाने ते सामाजिक मंज़ूरी मिलण जो सिलसिलो शुरू आहे। पेसो सामाजिक कमन जी कामियाबी वास्ते हिक ज़रूरत ज़रूर आहे पर इहो सलाहियत जी जगह वठी सघे इहो मुमकिन न आहे।
इन्हन सभनी जो गडियिल असर इहो आहे त सिंधी समाज मां आहिस्ते आहिस्ते ई सही पर सिलसिलेवार सामाजिकता घटिजी रही आहे नतीजे तोर न सिर्फ सिंधी समाज में एकता जी अणाठ थी नज़र अचे पर सिंधियत जे खातमे जी राह ते कदम रखण सबब सिंधी भाषा जो वज़ूद पिण खतरे में महसूस थिये थो।
गांधीनगर कोल्हापुर
14 October 2018

