काश मैं कुछ कर पाता
नकारात्मक सोच से समाज का अहित ही होता है ।
डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष
राज. सिन्धी अकादमी,जयपुर ।
संस्थापक सिन्धु सत्कार समिति अजमेर ।
मेरा एक पत्रकार मित्र हैं जो अक्सर मेरी तारीफ करता है यार डॉक साब सिन्धी समाज में जब भी इंकलाबी का जिक्र होगा आपको याद जरूर किया जाएगा । हर सिन्धी सम्मेलन के लिए हमेशा न्यौता आता है लेकिन नौकरी और परिवार मेरी प्राथमिकता है और जरूरत भी । इसलिए जाना संभव नहीं होता ।
कुछ दिन पहले एक सेल्फी मास्टर ने मुझसे आग्रह किया कि उसका नाम पैनल में है और मैं उसे समर्थन दूं । जब भी चुनाव आते हैं सिन्धी गैर सिन्धी का मुद्दा अजमेर की इस अघोषित सिन्धी सीट पर शुरू हो जाता है । आप पूरे 5 साल नेपथ्य में रहो और अचानक किसी का बी काम्प्लेक्स का इंजेक्शन मिलते ही खिलौने की तरह उछलकूद मचाओ कि मैं एमएलए क्यों नहीं । भैया मेरे में क्या कमी है । उनको ईश्वर सदबुद्धि दे कि भाई वो जमाने गए । हर किसी की किस्मत नानकराम जैसी नहीं हो सकती । उनकी झोली में भी टिकट यूँ ही नहीं गिरा । वे गरीबों के मसीहा थे और पार्षद भी । गहलोत सरकार की मेहरबानी से जीत भी गए । इनके एक सिन्धी भाऊ रणनीतिकार थे । मैं आज भी इनके ज्ञान और स्पष्टवाद का कायल हूं । किसी जमाने में आपने और अशोक गहलोत जी ने सेवादल से राजनीति शुरू की मगर आज वो प्रधानमंत्री की दौड़ में आ गए है । और मेरा मित्र लोगों को निपटाते 2 अपने दायरे मे भी सिमट नहीं पा रहे हैं। नकारात्मक सोच से आप कभी आगे नहीं बढ़ सकते । ये तय है ।
शहीद हेमू कालानी की विशाल रैलियों का आयोजन करने का सबसे पहला श्रेय मुझे और मेरी सिन्धु सत्कार समिति को प्राप्त है । उस समय अजमेर के सांसद भगवान देव आचार्य ने मुझे भी बी काम्प्लेक्स का इंजेक्शन लगाने की कोशिश की डॉ साब इतने सालों तक आप कहाँ थे । मेरे साथ दिल्ली चलो अजमेर पश्चिम से आपकी टिकट पक्की । मैंने भी हाथ जोड़े । मैं सिन्धी हूँ । जब तक किशन मोटवानी जिंदा है मैं सोचूंगा भी नहीं । अगले सत्र में मोटवानी जी राजस्व मंत्री बने और मुझे सिन्धी अकादमी के अध्यक्ष पद कैसे मिला उसकी चर्चा अगले सत्र में । मेरी इस प्रार्थना के साथ कि आपका भविष्य , सिन्धी समाज का और सिन्धी बोली, सभ्यता और संस्कृति का भविष्य आपके हाथ में है ।
आप दौड़े, अवश्य दौड़े । मगर अपने बलबूते पर । किसी की दी हुई बी काम्प्लेक्स इंजेक्शन के असर से मत दौड़ें ।
स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की मनाही नहीं है । समाज इतना लाचार भी नहीं कि किसी और को हमारे ही ख़िलाफ़ ज़हर उगलने की इजाज़त दे और सहन करें।
हर बार मैं और मेरे मित्र पत्रकार नरेश राघानी (कवि मधुकर) की भी दावेदारी रही है मगर इस बार हमने सिन्धी समाज का हित सोचा और शुरू से एक सिन्धी की मांग की है । हम अपने निर्णय पर अडिग हैं और समाज हित में पुनः एक नसीयत देना चाहेंगे कि किसी भी संगठन की सफ़लता ,समाज हित और एकता के 10 मूल मंत्र हमेशा याद रखें ...
1. संगठन और समाज के लिए मिलकर
लड़ाई लड़ो ।
2. लड़ नही सकते तो लिखो ।
3. लिख नही सकते तो बोलो ।
4. बोल नहीं सकते तो साथ दो ।
5. समाज के जयचंदों को पहचानो ।
6. समझाकर इन्हें मुख्य धारा में लाओ
और आम सहमति के लिए राजी करो ।
7. साथ भी नहीं दे सकते तो जो
लिख और बोल रहे हैं ,लड़ रहे हैं,
उनका अधिक से अधिक सहयोग करें । 8. ये भी न कर सकें तो कम से कम मनोबल
न गिरायें । क्योकि कहीं न कहीं कोई
आपके हिस्से की भी वे लड़ाई लड़ रहें हैं । 9. वे समाज हित में लड़ते आये है , लड़ते
रहेंगे । हम सब के लिए लड़ेंगे और
जीतेंगे ।
10. संगठन और समाज आपसे है, आपका है,संघर्ष के लिए ताकत दें ।
नकारात्मक सोच से समाज का अहित ही होता है । काश मेरा समाज इतना खोने के बाद अब तो संभले । काश मेरे साथी मेरी भावनाओं को समझ पाते । काश मैं कुछ कर पाता ।।।
असांजी नादानी सां असीं सिन्ध विन्याई
सिन्धी बोली भि बचाइण थी मुश्किल
कुछ समझण न अचे त हिक ही राग गायूँ
वाह रे सिन्धी वाह
हे आयोलाल सभई चओ झूलेलाल ।
डॉ लाल थदानी
पूर्व अध्यक्ष
राज. सिन्धी अकादमी,जयपुर ।
संस्थापक सिन्धु सत्कार समिति अजमेर ।
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