#मधुकर कहिन
*अजमेर में राजनीति की भेंट चढ़ाई जा रही है सिंधी समाज की एकता* -
*दुर्ग में सिंधी युवकों के साथ पुलिस द्वारा अमानवीय व्यवहार को लेकर* *सिंधु सत्कार समिति के प्रदर्शन को हाई जैक करने हेतु देवनानी और कंवल प्रकाश दोनों हुए सक्रिय*
💥नरेश राघानी💥
सिंधी समाज से राजस्थान की राजनीति मैं चमत्कारिक व्यक्तित्व रखने वाले स्वर्गीय किशन मोटवानी द्वारा 34 वर्ष पुरानी सामाजिक संस्था सिंधु सत्कार समिति के आव्हान पर छत्तीसगढ़ दुर्ग में दो सिंधी युवकों के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा अमानवीय व्यवहार के विरोध में आंदोलन का आगाज बीते दिनों किया गया । जिसके तहत 10 अप्रैल को समस्त सिंधी समाज के छोटे बड़े सभी नेताओं और सदस्यों को समिति द्वारा सूचित किया गया कि वह भी इस आंदोलन में अपना अपना योगदान दें और एकजुट होकर 10 अप्रैल को जिला कलेक्टर को इस विषय पर ज्ञापन दें। जिस पर सभी सामाजिक संस्थाओं ने अपने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी थी । परंतु इसमें भी सिंधी समाज के भीतर भाजपा से जुड़े राजनीतिज्ञों की खींचतान खुल कर सामने आ गयी है ।जिसकी वजह से अब सभी सामाजिक संगठन अपने अपने स्तर पर जिला कलेक्टर को ज्ञापन देने का काम अंजाम ला रहे हैं । इसी कड़ी में देवदानी द्वारा समर्थित सिंधु संगीत समिति नहीं 6 अप्रैल को कमलप्रकाश समर्थित सिंधी 7 अप्रैल को और सिंधु सत्कार समिति द्वारा समस्त सामाजिक संगठनों से 10 अप्रैल को यह कार्यक्रम करने की अपील की है। परंतु सवाल यह है कि जब सिंधु सत्कार समिति ने सभी समाज के वर्ग के लोगों को इस कार्यक्रम हेतु पहले ही आमंत्रित कर लिया है तो *इस तरह से समाज की एकता को क्यूँ बट्टा लगाया जा रहा है ?* *शायद सिंधु सत्कार समिति की इस पुनीत पहल की वजह से सिंधी समाज से जुड़े नेतागिरी करने वाले तत्वों को अपनी राजनीतिक जमीन हिलती हुई दिखाई देने लगी है। जिससे सभी ने सत्कार समिति की इस सोच पर चलते हुए अपनी अपनी खिचड़ी पकाना शुरू कर दिया है* । भाजपा नेता कमल प्रकाश और वासुदेव देवनानी की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा शहर में किसी से छुपी नहीं है । दोनों ही भाजपा से अजमेर उत्तर का टिकट पाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। इस पर एक सामाजिक संस्था के ऐसे आव्हान पर इन दोनों के बीच की प्रतिस्पर्धा खुलकर सामने आ गई जिसका यही संदेश आम लोगों में जा रहा है कि सिंधी समाज में दो भाजपा नेताओं के बीच टकराव की वजह से दो फाड़ है । वहीं तीसरा पक्ष सिंधु सत्कार समिति के साथ पूरे समाज के केवल वही लोग जुड़े हैं जो सिर्फ समाज हित में अपना कार्य करने के इच्छुक दिखाई देते हैं। *समिति के इस आंदोलन को देवनानी और कंवल प्रकाश हाईजैक करके पता नहीं क्या साबित करने की कोशिश कर रहे हैं* । *जबकि दुर्ग में जहां यह घटना हुई है वहां भाजपा की ही सरकार है , कंवल प्रकाश चाहे तो देवनानी से अनुरोध कर बिना इस सब तमाशे के केंद्र सरकार में देवनानी का राजनैतिक रसूख लगा कर खुद ही इस मुद्दे पर दुर्ग में बैठे पीड़ितों को राहत पहुंचाने का प्रयास कर सकते है । लेकिन नहीं साहब !!! ऐसा करने से इनकी नेतागिरी थोड़े ही चमकेगी , इन लोगों को तो टिकट की दौड़ में एक दूसरे से आगे निकलना है । समाज की एकता गयी भाड़ में* । यह सब देख कर सके बात तो तय है कि इन दोनों में से अगर किसी को भी भाजपा का टिकट मिल गया तो सिंधी समाज के भीतर इस आपसी फूट की वजह से उसका निपटना तय है। बात सिंधु सत्कार समिति की तो उस समिति के आदर्श स्व. किशन मोटवानी भले ही कांग्रेस पृष्ठभूमि के थे लेकिन इस समिति का वर्तमान प्रारूप बिल्कुल निष्पक्ष है जिसमें कांग्रेस भाजपा दोनों ही पार्टियों से जुड़े लोग शुमार हैं इसलिए इस पर किसी दल विशेष का कोई ठप्पा नहीं है।गौरतलब है कि कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा द्वारा राष्ट्रगान में सिंध शब्द हटाने की मांग पर भी समिति ने रिपुन बोरा का विरोध दर्ज करवाया है।
*खैर !!!! अब जो भी इस होड़ में आगे निकले लेकिन एक बात तो तय है कि इस सब से सिंधी समाज में जागृति तो आ रही है जिसका श्रेय निश्चित तौर पर राजनीति से परे हटकर काम कर रही सिंधु सत्कार समिति की प्रथम पहल को ही जायेगा* ।
जय श्री कृष्णा
नरेश राघानी
प्रधान संपादक
www.horizonhind.com
9829070307
No comments:
Post a Comment